जावा मोटर जावा मोटरसाइकिल की डिलीवरी पर पांच से आठ महीने का वेटिंग पीरियड है
August 26, 2019 • Surya Prakash

जावा मोटर जावा मोटरसाइकिल की डिलीवरी पर पांच से आठ महीने का वेटिंग पीरियड है, साइकिल की डिलीवरी पर पांच से आठ महीने का वेटिंग पीरियड है, बुलेट के चुनिंदा मॉडल्स भी हाथों हाथ उपलब्ध नहीं हैं, हेक्टर ने अप्रत्याशित बुकिंग के बाद आर्डर लेने बंद कर दिए, किया सेलटोस ने रिकॉर्ड बुकिंग की है, नई नवेली ह्युंडे नियोस ने अभी अभी घूंघट हटा मुहँ दिखाई क्या मांगी कि दूल्हों की लंबी कतार लग गयी है, तो फिर ये किस मंदी का जिक्र किया जा रहा है ऑटो सेक्टर में?

मीडिया की माने तो पारले के 5 रुपये का पैकेट लोग नहीं खरीद रहे है, तो फिर 180 रुपये की चॉक्लेट क्यों धड़ल्ले से बिक रही है? कपिल सिब्बल ने बोला इकॉनमी आई सी यु में है, और बस फिर तो हर लम्पट ने ये फ्रेज लपक लिया और लगा वही दोहराने, ठीक कपिल शर्मा द्वारा इज़ाद बाबाजी का ठुल्लू फ्रेज की तरह जो कॉमेडी शो से निकल कर राष्ट्रीय संवाद का अंग बन गया, किसी ने बोला "भाई मंदी आ गयी" तो लगे सब जेब टटोलने, अरे जेबें पहले से भरी थी क्या जो अब टटोल रहे हैं? पर चूंकि कपिल सिब्बल और चंद एंकरों ने बोला तो अब उन खाली जेबों में लोगों को सुराख भी दिखने लगे, इसे कहते हैं "भेड़ इफ़ेक्ट", एक चतुर सियार ने भेड़ों के बीच जाकर उन्ही सी आवाज़ में मिमिया दिया तो सारी भेडें मिमियाने लगी।

याद रहे ये वो देश है जो ग्लोबल मेल्टडाउन के दौर में भी मजबूती से डटा रहा। पारले के बिस्कुट नहीं बिक रहे तो करें वो अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी, प्रोडक्ट पैकेजिंग और क्वालिटी में बदलाव, ऐसा तो बिल्कुल नहीं है कि भाई सभी कंपनियों के बिस्कुट बिकने बंद हो गए, या सभी कंपनियों के वाहन बिकने बंद हो गए। खराब प्रबंधन से चल रही कंपनी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदार वो स्वयं है, इसलिए ऐसे फाल्स नैरेटिव को मजबूती देने वाले उदाहरणों से बचें, विश्व मंच पर हमारे देश की छवि धूमिल करने को अनेक ताकतें काम कर रही हैं, वे अत्यधिक संगठित व आर्गनाइज्ड हैं, हमे इनसे दो कदम आगे चलना है,

आज भी ये देश विदेशों सा क्रेडिट कार्ड और उधारी पर नहीं चलता, यहां हर हिंदुस्तानी को बिटिया की शादी, मां बाप, बच्चो की पढ़ाई दवाई के लिए बचत करनी पड़ती है, जिस देश में जरूरत पड़ने पर गुल्लक काम आती है, गुल्लक के बाद अलमारी में बिछे अखबार के नीचे छिपाये गए चंद रुपये और बहुत ही जरूरत आन पड़े तो आधा पौन तोला सोना, ऐसे देश की अर्थव्यवस्था को कोई ताकत नहीं हिला सकती, देश में हर तरह के दौर आते है और आते रहेंगे, बस सकारात्मक बने रहिये और देखिए कैसे हम हर मुश्किल दौर को मुस्कुराने पर विवश कर देंगे।