सुप्रीमकोर्ट के प्रख्यात वकील डॉ0 सुब्रमण्यम स्वामी ने यूपीए सरकार के परमाणु घोटाले का खुलासा किया है
August 27, 2019 • Surya Prakash

 

सुप्रीमकोर्ट के प्रख्यात वकील डॉ0 सुब्रमण्यम स्वामी ने यूपीए सरकार के परमाणु घोटाले का खुलासा किया है, इस घोटाले का असर राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है इसलिए दोषी व्यक्तियों को दंडित किया जाना नितान्त आवश्यक होगा।

इस खुलासे से यह ज्ञात होगा कि यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भारत की थ्योरियम तकनीक को कैसे नष्ट किया। मैडम सोनिया गांधी और उनके देशद्रोही गिरोह द्वारा 60,00,000 करोड़ मूल्य का थोरियम घोटाला किया गया है।
 
हाल के कालखंड में भारत के तटीय इलाकों से अवैध रेत खनन चल रहा है।  हम में से कई लोगों की गलत धारणा है कि इस रेत का उपयोग भवन निर्माण कार्यों के लिए किया जाता है।  लेकिन अगर हम ऐसा सोचते हैं, तो हम अधिक गलत नहीं हो सकते।
भारत में थ्योरियम का सबसे बड़ा जलाशय तमिलनाडु के साथ हमारे समुद्र तटों के साथ सम्बद्ध है, जो दुनिया में मौजूद भंडार से भी 30% से अधिक थोरियम जमा है!हमारे समुद्र तटों में रेत थोरियम से भरा हुआ है।
 
भारत थोरियम स्थित फास्ट ब्रीडर (FBT) परमाणु प्रौद्योगिकी में पीएम डॉ0 मनमोहन सिंह और केंद्रीय रक्षा मंत्री ए. के. एंथनी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आदेशों के तहत 10 साल तक इस पर कब्जा बनाये रखा।
एक बार जब सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में आई तो पूर्व प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह ने स्वदेशी थोरियम आधारित प्रौद्योगिकी कार्यक्रम (फास्ट ब्रीडर रिएक्टर या एफबीटी) को गंभीर रूप से कम करने की अलिखित नीति का पालन किया जिससे भारत एक उन्नत परमाणु ताकत पाने के लिए विदेशी देशों पर निर्भर हो गया। 

परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों ने दावा किया कि 2013 तक भारत को थोरियम आधारित 1 गीगावाट परमाणु रिएक्टर बनाने की तकनीक में महारत हासिल हो सकती थी जो अब चीन द्वारा पाकिस्तान को आपूर्ति की जा रही है।
 
समुद्र तट खनिज रेत की तस्करी और अवैध खनन 2007 के बाद केरल की तटीय इलाकों  में तब पनपना शुरू हुआ, जब इल्मेनाइट को संप्रग-एक के शासन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा निर्धारित पदार्थों की सूची से हटा दिया गया था।बहुत से भारतीयों को पता नहीं है कि दुर्लभ अर्थ खनिज टाइटेनियम को इल्मेनाइट से संसाधित किया जाता है।

भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों ने कहा, "चूंकि यूपीए सरकार में 2004 में मनमोहन सिंह के प्रधान मंत्री के रूप में पदभार संभाला था, 2.1 मिलियन टन दुर्लभ ईए आरएचएस जिसमें मोनाजाइट, इल्मेनाइट, सेरियम, गार्नेट, जिरकोन और रूटाइल शामिल थे, जो थोरियम के 195,300 टन के बराबर था। 

यह दुर्लभ EARTH (मोनाज़ाइट, थोरियम में काफी समृद्ध) बताया गया है कि यह एक शक्तिशाली खनन कार्टेल द्वारा अन्य देशों को निर्यात किया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनियां गांधी के सहयोग से चीन को हमसे इतनी थोरियम प्राप्त हुई कि यह अगले 24,000 वर्षों तक चलेगा।

चीनी अब संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से THORIUM MOLTEN SALT REACTOR (MSR) प्रौद्योगिकी विकसित कर रहे हैं।  इसलिए चीन अब क्लीन न्यूक्लियर पावर की दौड़ में लीड ले रहा है!  यह हमारा होना चाहिए था लेकिन इतालवी महिला और उसके गद्दार सिपाहियों के सहयोग से अब चीन के पास है।

हमसे चीन आगे नहीं गया है कांग्रेस के सहयोग व उसके द्वारा किये गए राष्ट्रद्रोह की वजह से चीन हमसे बढ़त बना पाया है।बहुत जल्द भारत इस महा शाजिश को बेनकाब करेगा ।
भारत माता की जय।